रायगढ़ (अनिल आहूजा वायरलेस न्यूज़)।छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ के प्रांतीय आवाहन पर आज रायगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मागों को लेकर एक दिवसीय धरना रैली प्रदर्शन किया। सरकारी कर्मचारी घोषित करने, 11 हजार रुपए वेतन दिए जाने, भत्ता देने समेत 9 मांगों को लेकर आज शहर के रामलीला मैदान से रैली निकालकर छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्टेशन चौक, शहीद चौक होते हुए नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची और गेट के सामने ही धरने पर बैठ गई। जहां पुलिस प्रशासन भी पहले से मुस्तैद थी। वहाँ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व महिला बाल विकास विभाग के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि अगर उनकी मांगें 4 मार्च तक पूरी नहीं होती है तो वे 5 मार्च को रायपुर में प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन व रैली कर महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपेंगे।

अनिता नायक जिला शाखा अध्यक्ष, रायगढ़ का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव के समय जो वादा किया था उसे दो वर्ष पूरा होने के बाद भी पुरा नहीं किया है। उनके द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही कि उन्हे शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे, शिक्षाकर्मी जो पहले पंचायत के अधीन वे, उन्हें नीति निर्धारित कर छ.ग.सरकार द्धारा उन्हें शासकीय कर्मचारी बनाया गया है. इसी तरह प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को भी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे। मध्यप्रदेश और अन्‍य राज्यो की भांति छ.ग. में भी कम से कम 11000 रु मासिक मानदेय स्वीकृत किया जावे। कंग्रेस पार्टी के चुनावी जन-घोषणा पत्र में ऑगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नर्सरी शिक्षक के रूप में उन्नयन करने की घोषणा की गई जो दो वर्ष के बाद भी वायदा पूरा नहीं किया गया है, शीघ्र पूरी करवायी जाये। समूह बीमा, मासिक पेंशन हेतु नीति निर्धारित कर इसका लाभ दिया जाये। ऑगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ताओं के पद पर सहायिकाओं को लिए जाने के वर्तमान में 25 प्रतिशत का बन्धन रखा गया है. परियोजना कार्यालयों में पद रिक्त होते ही विज्ञापन निकाल दिया जाता है जिसके कारण एक-दो पद में प्रतिशत की पूर्ति नहीं होने के कारण सहायिकाओं को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा और जिस केन्द्र में कार्यकर्ता का पद रिक्त हुआ है, वहाँ की सहायिका उसके योग्य है, तो पर भी वहाँ उसकी भर्ती न ढोकर सीधी भर्ती से कार्यकर्ता की पूर्ति की जा रही है। जो विचारणीय है।इसके लिए 25 प्रतिशत के बन्धन का समाप्त किया जावे और कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों पर सहायिकाओं को निशर्त लिया जावे। ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया ढै लेकिन धुलाई भत्ता नहीं दिया जाता ढै. कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को धुलाई भत्ता 500/ रु प्रतिमाह दिया जाए। महिला एवं बाल विकास के अन्तर्गत कार्यरत पर्यवेक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड निर्धारित किया जावे. जब कार्यकर्ता सहायिका स्थानीय महिला हैं, उसके बावजूद भी उनका ड्रेस कोड है तो पर्वेक्षकों के लिए क्यों नहीं हो सकता? लागू किया जाय। मिनी ऑगनबाड़ी को मुख्य ऑगनबाड़ी केन्द्र में संविलियन किया जाय।

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